प्रमुख हनुमान श्लोक और मंत्र — देवनागरी और अंग्रेज़ी में, उनके अर्थ और जहाँ ज्ञात है वहाँ उनके मूल स्रोत सहित।
हनुमान श्लोक और मंत्र
भगवान हनुमान, भक्ति, शक्ति और ज्ञान के प्रतीक, भय और संकट दूर करने वाले देवता के रूप में पूरे विश्व में पूजनीय हैं। यह मार्गदर्शिका प्रसिद्ध हनुमान श्लोक और मंत्र उनके अर्थ, स्रोत और पारंपरिक जप विधि सहित प्रस्तुत करती है।
भक्त हनुमान श्लोकों का जप क्यों करते हैं?
भक्त साहस, एकाग्रता और कठिन समय में सुरक्षा के भाव के लिए हनुमान श्लोकों का जप करते हैं। नियमित जप करने वाले भक्त प्रायः अनुभव करते हैं:
- भय और नकारात्मक विचारों से मुक्ति
- बेहतर एकाग्रता और मानसिक स्पष्टता
- आध्यात्मिक संरक्षण और मार्गदर्शन का भाव
- बढ़ा हुआ साहस और आत्मविश्वास
ये आस्था और व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित भक्तिपूर्ण अनुभव हैं, वैज्ञानिक दावे नहीं। हनुमान जी से जुड़ी अन्य सामग्री भी पढ़ें।
अर्थ सहित हनुमान श्लोक और मंत्र
1. हनुमान मूल मंत्र
मंत्र:
ॐ हनुमते नमः |
Om Hanumate Namah |
अर्थ:
भगवान हनुमान को नमन।
विधि: सबसे सरल हनुमान मंत्र, जिसके लिए दीक्षा की आवश्यकता नहीं। प्रायः माला पर 108 बार जपा जाता है।
2. हनुमान ध्यान श्लोक (मनोजवं)
श्लोक:
मनोजवं मारुत-तुल्य-वेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानर-यूथ-मुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥
Manojavam Maruta-Tulya-Vegam Jitendriyam Buddhi-Mataam Varishtham | Vatatmajam Vanara-Yutha-Mukhyam Shri-Rama-Dootam Sharanam Prapadye ||
अर्थ:
मैं श्रीराम के दूत की शरण लेता हूँ — जो मन के समान तीव्र और वायु के समान वेगवान हैं, जिन्होंने इंद्रियों को जीत लिया है, जो बुद्धिमानों में श्रेष्ठ हैं, पवनपुत्र हैं और वानर सेना के प्रमुख हैं।
स्रोत: श्री राम रक्षा स्तोत्र। यह हनुमान जी का सबसे प्रचलित ध्यान श्लोक है।
3. बजरंग बाण (प्रारंभिक दोहा)
दोहा:
निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥
Nishchay Prem Prateeti Te, Binay Karain Sanman |
Tehi Ke Karaj Sakal Shubh, Siddh Karain Hanuman ||
अर्थ:
जो दृढ़ प्रेम और विश्वास के साथ विनयपूर्वक हनुमान जी का सम्मान करते हैं, उनके सभी शुभ कार्य हनुमान जी सिद्ध करते हैं।
स्रोत: बजरंग बाण — अवधी भाषा का स्तोत्र, जिसे परंपरागत रूप से तुलसीदास जी की रचना माना जाता है और जो गंभीर संकट के समय पढ़ा जाता है।
4. हनुमान गायत्री मंत्र
मंत्र:
ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि।
तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्॥
Om Anjaneyaya Vidmahe Vayuputraya Dhimahi |
Tanno Hanumat Prachodayat ||
अर्थ:
हम अंजना के पुत्र को जानते हैं, पवनपुत्र का ध्यान करते हैं; हनुमान हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।
ध्यान दें: यह गायत्री छंद में रचित देव-गायत्री है, जो ऋग्वेद के गायत्री मंत्र से भिन्न है।
5. हनुमान रुद्र मंत्र
मंत्र:
ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् |
Om Ham Hanumate Rudratmakaya Hum Phat |
अर्थ:
ॐ, रुद्र (शिव) स्वरूप हनुमान को नमन।
ऐसे बीज मंत्र परंपरागत रूप से गुरु से दीक्षा लेकर ही जपे जाते हैं।
6. हनुमान चालीसा (प्रारंभिक दोहे)
दोहे:
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस विकार॥
अर्थ:
गुरु के चरण-कमलों की धूल से मन रूपी दर्पण को निर्मल कर, मैं श्री रघुवीर के उस निर्मल यश का वर्णन करता हूँ जो चारों फल देने वाला है। स्वयं को बुद्धिहीन जानकर मैं पवनपुत्र का स्मरण करता हूँ; मुझे बल, बुद्धि और विद्या दें तथा मेरे क्लेश और विकार दूर करें।
7. संकट मोचन हनुमान अष्टक
प्रथम छंद:
बाल समय रबि भक्षि लियो तब, तीनहुँ लोक भयो अन्धियारो।
ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो॥
…
को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥
अर्थ:
बाल्यावस्था में आपने सूर्य को निगल लिया, जिससे तीनों लोकों में अंधकार छा गया। सारा संसार भयभीत हो गया और यह संकट कोई टाल न सका। हे कपि, संसार में कौन नहीं जानता कि आपका नाम संकटमोचन है?
स्रोत: आठ छंदों का स्तोत्र, जिसे परंपरागत रूप से तुलसीदास जी की रचना माना जाता है। प्रत्येक छंद एक संकट का स्मरण कराता है और एक ही टेक पर समाप्त होता है।
हनुमान श्लोकों का जप कैसे करें
- सुबह जल्दी या शाम के समय (सूर्योदय/सूर्यास्त) जप करें।
- पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें।
- गिनती के लिए तुलसी या रुद्राक्ष की माला का उपयोग करें।
- स्वच्छ और शांत वातावरण रखें।
- भक्ति और एकाग्रता से जप करें — परंपरा शुद्ध उच्चारण से अधिक सच्ची श्रद्धा को महत्व देती है।
जो लोग अपने आध्यात्मिक अभ्यास को गहराई से अपनाना चाहते हैं, वे ब्लॉगशॉग पर आंतरिक शांति के लिए ध्यान की शक्ति को जानें लेख भी पढ़ सकते हैं।
हनुमान मंत्रों के जप के लिए सर्वोत्तम दिन
- मंगलवार और शनिवार हनुमान पूजा के लिए परंपरागत रूप से सबसे शुभ माने जाते हैं।
- कई भक्त इन दिनों उपवास रखते हैं या हनुमान मंदिर जाते हैं।
- हनुमान जयंती, हनुमान जी के जन्म का पर्व, वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण अवसर है।
हनुमान श्लोक और मंत्रों से जुड़े प्रश्न
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सबसे प्रचलित हनुमान मंत्र कौन सा है?
सबसे सरल और सबसे प्रचलित हनुमान मंत्र मूल मंत्र ॐ हनुमते नमः है, जिसका अर्थ है भगवान हनुमान को नमन। भक्त इसे साहस और सुरक्षा के लिए प्रायः माला पर 108 बार जपते हैं, और दीक्षा की आवश्यकता न होने के कारण यह शुरुआती भक्तों के लिए सबसे उपयुक्त है।
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मनोजवं श्लोक कहाँ से लिया गया है?
मनोजवं मारुत-तुल्य-वेगं, हनुमान जी का सबसे प्रसिद्ध ध्यान श्लोक, श्री राम रक्षा स्तोत्र से लिया गया है। इसमें हनुमान जी को मन और वायु के समान वेगवान, जितेन्द्रिय, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ, पवनपुत्र, वानर सेना के प्रमुख और श्रीराम के दूत के रूप में वर्णित किया गया है।
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बजरंग बाण क्या है?
बजरंग बाण हनुमान जी का अवधी भाषा का स्तोत्र है, जिसे परंपरागत रूप से तुलसीदास जी की रचना माना जाता है और जो गंभीर संकट के समय पढ़ा जाता है। इसका प्रारंभिक दोहा है निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान — अर्थात दृढ़ प्रेम और विश्वास से सम्मान करने वालों के कार्य हनुमान जी सिद्ध करते हैं।
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संकट मोचन हनुमान अष्टक क्या है?
संकट मोचन हनुमान अष्टक आठ छंदों का स्तोत्र है, जिसे परंपरागत रूप से तुलसीदास जी की रचना माना जाता है। प्रत्येक छंद हनुमान जी द्वारा दूर किए गए किसी संकट का स्मरण कराता है, जैसे बचपन में सूर्य को निगलना, और हर छंद इस टेक पर समाप्त होता है: को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।
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हनुमान गायत्री मंत्र क्या है?
हनुमान गायत्री मंत्र, ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्, गायत्री छंद में रचित देव-गायत्री है, जिसका अर्थ है: हम अंजना के पुत्र को जानते हैं, पवनपुत्र का ध्यान करते हैं, हनुमान हमें प्रेरित करें। यह ऋग्वेद के सवितृ को समर्पित गायत्री मंत्र से भिन्न है।
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रोज कौन सा हनुमान श्लोक जपना चाहिए?
दैनिक अभ्यास के लिए भक्त प्रायः मनोजवं ध्यान श्लोक या हनुमान चालीसा के दो प्रारंभिक दोहों का जप करते हैं, जिनमें एक मिनट से भी कम समय लगता है। कई भक्त मंगलवार और शनिवार को, जो हनुमान जी के लिए सबसे शुभ दिन माने जाते हैं, पूरी हनुमान चालीसा का पाठ भी करते हैं।
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हनुमान मंत्रों का जप कैसे करें?
हनुमान मंत्रों का जप परंपरागत रूप से सुबह जल्दी या संध्या के समय, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके, स्वच्छ और शांत स्थान पर, 108 मनकों की तुलसी या रुद्राक्ष माला पर गिनकर किया जाता है। परंपरा शुद्ध उच्चारण से अधिक सच्ची श्रद्धा को महत्व देती है, और 11 या 21 बार से शुरुआत उचित है।
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क्या हनुमान बीज मंत्र बिना दीक्षा के जपे जा सकते हैं?
परंपरा के अनुसार ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् जैसे बीज मंत्र गुरु से दीक्षा लेकर ही जपे जाते हैं। ॐ हनुमते नमः, हनुमान गायत्री और हनुमान चालीसा जैसे नाम-मंत्र और स्तोत्र कोई भी पढ़ सकता है।
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हनुमान मंत्र जपने के लिए सबसे अच्छा दिन कौन सा है?
मंगलवार और शनिवार हनुमान मंत्रों के जप के लिए परंपरागत रूप से सबसे शुभ दिन हैं: कई परंपराओं में मंगलवार को हनुमान जी के जन्म से जोड़ा जाता है, और शनिवार को शनि देव के प्रभाव से भक्तों की रक्षा से। हनुमान जयंती वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण अवसर है।
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हनुमान मंत्र जपने के क्या लाभ हैं?
भक्त परंपरागत रूप से साहस, सुरक्षा, एकाग्रता और भय से मुक्ति के लिए हनुमान श्लोक और मंत्रों का जप करते हैं, और कई भक्तों को नियमित जप से मन स्थिर लगता है। ये आस्था और अनुभव पर आधारित भक्तिपूर्ण लाभ हैं; जप आध्यात्मिक साधना है, चिकित्सा या मनोवैज्ञानिक उपचार का विकल्प नहीं।