राम नवमी 2027 गुरुवार, 15 अप्रैल को है। यह भगवान राम के जन्म का पर्व है, जो चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है और चैत्र नवरात्रि का अंतिम दिन है। इस मार्गदर्शिका में तिथि और पूजा मुहूर्त, राम जन्म की कथा, चरणबद्ध पूजा विधि, व्रत के नियम, मंत्र और देशभर के उत्सव दिए गए हैं।
राम नवमी 2027 की तिथि और पूजा समय
| तिथि | गुरुवार, 15 अप्रैल 2027 |
| हिंदू तिथि | चैत्र शुक्ल नवमी |
| जन्म क्षण (मध्याह्न) | लगभग 12:20 PM (नई दिल्ली) |
| साथ ही | चैत्र नवरात्रि का अंतिम दिन |
परंपरा के अनुसार भगवान राम का जन्म दोपहर में हुआ था, इसलिए मुख्य पूजा मध्याह्न काल में की जाती है — लगभग दोपहर के दो घंटे पहले और बाद तक। मध्याह्न की गणना स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त से होती है, इसलिए समय हर शहर में भिन्न होता है; कृपया अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
राम जन्म की कथा क्या है?
वाल्मीकि रामायण के बालकांड (अध्याय 18) के अनुसार, अयोध्या के राजा दशरथ ने संतान प्राप्ति के लिए पुत्रकामेष्टि यज्ञ किया। यज्ञ की अग्नि से प्रकट हुए दिव्य पुरुष ने उन्हें पायस (खीर) दी, जिसे राजा ने अपनी रानियों में बाँटा। इसके फलस्वरूप कौशल्या ने राम को चैत्र शुक्ल नवमी को पुनर्वसु नक्षत्र में जन्म दिया; कैकेयी ने भरत को तथा सुमित्रा ने लक्ष्मण और शत्रुघ्न को।
भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है — वे आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति और आदर्श राजा हैं, जिन्होंने कभी धर्म की मर्यादा नहीं लाँघी।
राम नवमी पूजा की तैयारी कैसे करें?
- घर की सफाई — एक दिन पहले पूरे घर, विशेषकर पूजा स्थान की सफाई करें।
- वेदी की स्थापना — राम दरबार (राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान) की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें; यदि हो तो बाल राम के लिए छोटा पालना रखें।
- सजावट — आम के पत्तों का तोरण, पीले फूल और दीये।
पूजा सामग्री
गंगाजल, तुलसी के पत्ते, फल, पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, चीनी), अगरबत्ती, अक्षत, चंदन, कुमकुम, केसर, पान के पत्ते, कलश, पीला वस्त्र, फूल और दीया।

चरणबद्ध राम नवमी पूजा विधि
- संकल्प — पूर्व दिशा की ओर मुख करके हाथ में जल और अक्षत लेकर भक्ति से व्रत का संकल्प लें।
- कलश स्थापना — जल से भरा कलश, ऊपर आम के पत्ते रखें।
- अभिषेक — प्रतिमा को जल और पंचामृत से स्नान कराएँ और ॐ श्री रामाय नमः का जप करें।
- श्रृंगार — पीला या केसरिया वस्त्र अर्पित करें और चंदन का तिलक लगाएँ।
- जन्म क्षण — मध्याह्न में पालना झुलाएँ और घंटी बजाकर राम जन्म का उत्सव मनाएँ।
- नैवेद्य — पानकम (गुड़ और काली मिर्च का पेय), फल और खीर अर्पित करें।
- कथा और आरती — रामायण या रामचरितमानस से राम जन्म प्रसंग पढ़ें, फिर आरती करें।
राम नवमी व्रत के नियम क्या हैं?
- फलाहार व्रत (सबसे प्रचलित) — फल, दूध, दही, सूखे मेवे, साबूदाना और सिंघाड़े के आटे के व्यंजन।
- सात्विक व्रत — अनाज रहित, पूजा के बाद या सूर्यास्त पर एक बार सरल शाकाहारी भोजन।
- निर्जला व्रत — पूजा तक बिना जल और भोजन; कुछ अनुभवी भक्त ही रखते हैं।
| अनुमत | परहेज |
|---|---|
| फल, दूध, दही | गेहूँ और चावल |
| शकरकंद | प्याज और लहसुन |
| साबूदाना खिचड़ी | दालें और साधारण नमक |
| नारियल पानी | प्रसंस्कृत भोजन |
| मखाना खीर | मदिरा और मांस |
राम नवमी अप्रैल की गर्मी में आती है। निर्जला व्रत न रखने वालों को पर्याप्त जल पीते रहना चाहिए। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं तथा मधुमेह या अन्य रोग से ग्रस्त लोगों को निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए।
राम नवमी पर कौन से मंत्र जपें?
- राम तारक मंत्र — श्री राम जय राम जय जय राम, तेरह अक्षरों का मंत्र, जिसे संत समर्थ रामदास ने प्रसिद्ध किया।
- षडाक्षरी मंत्र — ॐ रामाय नमः।
- राम रक्षा स्तोत्र — ऋषि बुध कौशिक द्वारा रचित रक्षा स्तोत्र।
- हनुमान चालीसा — कई भक्त राम के परम भक्त हनुमान की हनुमान चालीसा का पाठ भी करते हैं।
माला पर 108 बार जप करना शुभ माना जाता है।
भारत में राम नवमी कैसे मनाई जाती है?
- अयोध्या — राम जन्मभूमि मंदिर में सबसे भव्य उत्सव; भक्त सरयू नदी में स्नान करते हैं।
- उत्तर भारत — शोभा यात्राएँ, मंदिरों में उत्सव और चैत्र नवरात्रि व्रत का पारण।
- महाराष्ट्र — दोपहर में राम जन्मोत्सव कीर्तन, पालना झुलाना और पानकम वितरण।
- दक्षिण भारत — सीता राम कल्याणम, विशेषकर तेलंगाना के भद्राचलम मंदिर में।
- पूर्वी भारत — दिनभर सामूहिक भजन और कीर्तन।
व्यस्त भक्त राम नवमी कैसे मनाएँ?
- रामायण या रामचरितमानस का एक अध्याय पढ़ें।
- 11 मिनट तक राम नाम का जप करें।
- क्रोध और कठोर वाणी से बचें।
- भोजन दान करें या राहगीरों को पानकम और जल पिलाएँ।
राम नवमी का सार विधि की पूर्णता नहीं, बल्कि राम के आदर्शों — सत्य, कर्तव्य, धैर्य और करुणा — को जीवन में उतारना है। श्री राम जय राम जय जय राम 🙏
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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राम नवमी 2027 कब है?
राम नवमी 2027 गुरुवार, 15 अप्रैल को है। यह चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि और चैत्र नवरात्रि का अंतिम दिन है। मुख्य पूजा मध्याह्न काल में की जाती है, जिसे राम जन्म का क्षण माना जाता है — नई दिल्ली में लगभग 12:20 बजे; समय शहर के अनुसार बदलता है।
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राम नवमी क्यों मनाई जाती है?
राम नवमी भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान राम के जन्म का उत्सव है, जो अयोध्या में राजा दशरथ और रानी कौशल्या के यहाँ हुआ था। वाल्मीकि रामायण के बालकांड, अध्याय 18 के अनुसार उनका जन्म चैत्र शुक्ल नवमी को पुनर्वसु नक्षत्र में हुआ था।
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राम नवमी की पूजा दोपहर में क्यों होती है?
राम नवमी की पूजा मध्याह्न काल में होती है क्योंकि परंपरा के अनुसार भगवान राम का जन्म दोपहर में हुआ था। मंदिरों में इसी क्षण पालना झुलाकर और घंटियाँ बजाकर जन्मोत्सव मनाया जाता है, और वही तिथि चुनी जाती है जिसमें मध्याह्न में नवमी हो।
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राम नवमी व्रत में क्या खा सकते हैं?
फलाहार व्रत में फल, दूध, दही, सूखे मेवे, शकरकंद, साबूदाना और सिंघाड़े के आटे के व्यंजन खाए जाते हैं, जबकि गेहूँ, चावल, दालें, प्याज, लहसुन और साधारण नमक वर्जित हैं। व्रत मध्याह्न पूजा के बाद या सूर्यास्त पर खोला जाता है।
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क्या राम नवमी पर व्रत अनिवार्य है?
नहीं। व्रत भक्ति का विषय है, और सच्ची प्रार्थना, रामायण पाठ, जप तथा दान भी उतने ही सार्थक हैं। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और मधुमेह या अन्य रोग से ग्रस्त लोगों को कठोर या निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए।
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राम नवमी पर कौन सा मंत्र जपें?
सबसे प्रचलित मंत्र राम तारक मंत्र — श्री राम जय राम जय जय राम — है, जिसे महाराष्ट्र के संत समर्थ रामदास ने प्रसिद्ध किया। भक्त ॐ रामाय नमः का जप, राम रक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा का पाठ भी करते हैं।
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सीता राम कल्याणम क्या है?
सीता राम कल्याणम राम और सीता के विवाह का उत्सव है, जो दक्षिण भारत में राम नवमी के दिन मनाया जाता है। सबसे प्रसिद्ध आयोजन तेलंगाना के भद्राचलम स्थित सीता रामचंद्रस्वामी मंदिर में होता है, जहाँ लाखों भक्त एकत्र होते हैं।
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पानकम क्या है?
पानकम गुड़, जल, काली मिर्च और इलायची से बना शीतल पेय है, जो राम नवमी पर भगवान राम को नैवेद्य के रूप में अर्पित किया जाता है और भक्तों में बाँटा जाता है। अप्रैल की गर्मी में यह दक्षिण भारत और महाराष्ट्र में विशेष रूप से प्रचलित है।