माँ दुर्गा की सबसे प्रसिद्ध आरती ॐ जय अम्बे गौरी — पूरे बोल, हर पंक्ति का अर्थ, इसके रचयिता, और इसे कब व कैसे गाया जाता है। शारदीय नवरात्रि 2026 रविवार, 11 अक्टूबर से विजयादशमी, मंगलवार 20 अक्टूबर तक है।
ॐ जय अम्बे गौरी माँ दुर्गा की सबसे अधिक गाई जाने वाली आरती है। इसके अंतिम पद में शिवानंद स्वामी का नाम आता है — वही रचयिता जिन्हें परंपरा शिव आरती ॐ जय शिव ओंकारा का भी श्रेय देती है। आरती में माँ के सौंदर्य और दुर्गा सप्तशती में वर्णित उनकी विजयों का गान है — महिषासुर, शुंभ-निशुंभ, चण्ड-मुण्ड, रक्तबीज और मधु-कैटभ। माँ दुर्गा के बारे में और पढ़ें।
माँ दुर्गा की आरती | Maa Durga Aarti in Hindi
ॐ जय अम्बे गौरी…
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को ।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै ।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी ।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती ।
कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती ।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे ।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी ।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों ।
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता,
भक्तन की दुख हरता । सुख संपति करता ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
भुजा चार अति शोभित, खडग खप्पर धारी ।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती ।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।
भक्त दुर्गा आरती क्यों करते हैं?
भक्त आरती से अनेक आध्यात्मिक और भावनात्मक लाभ बताते हैं। ये आस्था और परंपरा पर आधारित हैं, वैज्ञानिक दावे नहीं:
- आध्यात्मिक उन्नति: आरती माँ से गहरे आध्यात्मिक जुड़ाव का माध्यम है।
- संरक्षण: भक्त मानते हैं कि बुराई का नाश करने वाली माँ दुर्गा नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करती हैं।
- शक्ति और साहस: माँ का योद्धा स्वरूप जीवन की चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा देता है।
- मन की शांति: कई भक्तों को आरती की लय से शांति मिलती है।
- अंधकार पर प्रकाश: आरती का दीपक अज्ञान के अंधकार को दूर करने का प्रतीक है।
- समृद्धि का आशीर्वाद: आरती के अपने पद सुख-संपत्ति का वचन देते हैं, और भक्त इसी भाव से माँ से प्रार्थना करते हैं।
- सामूहिक भक्ति: घरों और पंडालों में साथ गाई जाने वाली आरती समुदाय को जोड़ती है। कई भक्त साथ में दुर्गा चालीसा का पाठ भी करते हैं।
अर्थ सहित दुर्गा माँ की आरती | Maa Durga Aarti in Hindi with Meaning
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
माँ अम्बे गौरी और श्यामा गौरी की जय हो। विष्णु, ब्रह्मा और शिव दिन-रात आपका ध्यान करते हैं।
मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को। उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥
आपकी मांग में सिंदूर सुशोभित है और माथे पर कस्तूरी (मृगमद) का टीका है। आपके दोनों नेत्र उज्ज्वल हैं और मुख चंद्रमा के समान सुंदर है।
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै। रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥
आपका शरीर सोने के समान दमकता है, आप लाल वस्त्र धारण करती हैं, और गले में लाल फूलों की माला सजी है।
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी। सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥
आप सिंह पर विराजमान हैं और खड्ग व खप्पर धारण करती हैं। देवता, मनुष्य और मुनि आपकी सेवा करते हैं, और आप उनके दुख हरती हैं।
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती॥
कानों में कुंडल और नाक में मोती शोभित है। आपकी ज्योति करोड़ों चंद्रमाओं और सूर्यों के समान है।
शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥
आपने शुंभ और निशुंभ को चीर डाला और महिषासुर का वध किया। आपके धूम्र-वर्ण नेत्र दिन-रात दिव्य आनंद में मग्न रहते हैं।
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे। मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
आपने चण्ड और मुण्ड का संहार किया और रक्तबीज का नाश किया — वह असुर जिसकी रक्त (शोणित) की हर बूँद से नया असुर उत्पन्न होता था। आपने मधु और कैटभ को मारकर देवताओं को भयमुक्त किया।
ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी। आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥
आप ही ब्रह्माणी (ब्रह्मा की शक्ति), रुद्राणी (शिव की शक्ति) और कमला (लक्ष्मी) हैं। वेद और शास्त्र आपकी महिमा गाते हैं; आप शिव की पटरानी हैं।
चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों। बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू॥
चौंसठ योगिनियाँ मंगल गान करती हैं और भैरव नृत्य करते हैं। ताल, मृदंग और डमरू बजते हैं।
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता। भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता॥
आप ही जगत की माता हैं और आप ही उसका पालन करती हैं। आप भक्तों के दुख हरती हैं और उन्हें सुख-संपत्ति देती हैं।
भुजा चार अति शोभित, खडग खप्पर धारी। मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥
आपकी चार भुजाएँ अत्यंत शोभित हैं। आपकी सेवा करने वाले नर-नारी मनचाहा फल पाते हैं।
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती। श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती॥
सोने की थाली में अगर और कपूर की बत्तियाँ जल रही हैं; आप करोड़ों रत्नों की ज्योति से दमकती हैं।
श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे। कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे॥
शिवानंद स्वामी कहते हैं कि जो कोई माँ अम्बे की यह आरती गाता है, वह सुख और संपत्ति पाता है।
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दुर्गा आरती से जुड़े प्रश्न
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माँ दुर्गा की सबसे प्रसिद्ध आरती कौन सी है?
माँ दुर्गा की सबसे प्रसिद्ध आरती ॐ जय अम्बे गौरी है, जो उत्तर भारत के घरों, मंदिरों और नवरात्रि पंडालों में गाई जाती है। इसमें माँ के सौंदर्य और महिषासुर, शुंभ-निशुंभ, चण्ड-मुण्ड, रक्तबीज तथा मधु-कैटभ पर उनकी विजय का गान है।
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ॐ जय अम्बे गौरी के रचयिता कौन हैं?
ॐ जय अम्बे गौरी का श्रेय परंपरा से शिवानंद स्वामी को दिया जाता है, जिनका नाम इसके अंतिम पद में आता है: कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे। इन्हीं रचयिता को शिव आरती ॐ जय शिव ओंकारा का भी श्रेय दिया जाता है, यद्यपि उनके बारे में ऐतिहासिक जानकारी बहुत कम है।
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शोणित बीज का अर्थ क्या है?
आरती की पंक्ति शोणित बीज हरे में शोणित बीज का अर्थ है रक्तबीज — दुर्गा सप्तशती में वर्णित वह असुर जिसके रक्त की हर बूँद धरती पर गिरते ही नया असुर बन जाती थी। शोणित का अर्थ रक्त और बीज का अर्थ बीज है; देवी ने काली रूप में उसका रक्त पीकर उसका अंत किया।
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दुर्गा आरती कब गाई जाती है?
दुर्गा आरती माँ के मंदिरों और घरों में प्रतिदिन सुबह और शाम गाई जाती है, और विशेष रूप से नवरात्रि की नौ रातों व दुर्गा पूजा में। शारदीय नवरात्रि 2026 रविवार, 11 अक्टूबर से विजयादशमी, मंगलवार 20 अक्टूबर तक है।
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क्या दुर्गा आरती केवल नवरात्रि में ही की जाती है?
नहीं। दुर्गा आरती किसी भी दिन की जा सकती है, और कई परिवार इसे प्रतिदिन सुबह-शाम गाते हैं। नवरात्रि में इसका विशेष महत्व है, जब इसे प्रायः नवदुर्गा के प्रत्येक दिन की पूजा के बाद गाया जाता है।
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दुर्गा आरती के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?
दुर्गा आरती के लिए घी का दीपक या कपूर, धूप, गुड़हल जैसे लाल फूल, सिंदूर, लाल चुनरी और फल, हलवा या मिठाई का प्रसाद चाहिए। घंटी बजाते हुए दीपक को माँ के सामने घड़ी की दिशा में घुमाया जाता है।
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क्या दुर्गा आरती घर पर की जा सकती है?
हाँ। दुर्गा आरती घर पर माँ के चित्र या मूर्ति के सामने, स्नान के बाद फूल और धूप अर्पित करके की जा सकती है। इसके लिए पुजारी की आवश्यकता नहीं है, और कई परिवार विशेषकर नवरात्रि में इसे प्रतिदिन साथ गाते हैं।
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दुर्गा आरती के क्या लाभ हैं?
भक्त परंपरा से संरक्षण, साहस, मन की शांति और समृद्धि के लिए दुर्गा आरती गाते हैं और बुराई का नाश करने वाली माँ का आशीर्वाद माँगते हैं। ये आस्था और परंपरा पर आधारित भक्तिपूर्ण लाभ हैं, चिकित्सीय या वैज्ञानिक दावे नहीं।