दीवाली 2026 रविवार, 8 नवंबर को है। लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त प्रदोष काल में, यानी स्थानीय सूर्यास्त के बाद लगभग दो घंटे के भीतर रहता है — दिल्ली में लगभग शाम 5:30 से 7:30 बजे और मुंबई-पुणे में लगभग 6:05 से 8:05 बजे (अलग-अलग पंचांगों में इसमें थोड़ा अंतर मिलता है)। इस मार्गदर्शिका में घर पर लक्ष्मी पूजा की संपूर्ण विधि, सामग्री सूची और लक्ष्मी आरती दी गई है।
दीवाली, रोशनी का त्योहार, लक्ष्मी पूजा के बिना अधूरी है — यह धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी माता लक्ष्मी को समर्पित पवित्र अनुष्ठान है। कार्तिक अमावस्या की रात घर-घर में सफाई करके, दीये जलाकर और रंगोली बनाकर देवी का स्वागत किया जाता है।
दीवाली 2026 कब है?
| दिन | तिथि (2026) |
| धनतेरस | शुक्रवार, 6 नवंबर |
| नरक चतुर्दशी (छोटी दीवाली) | शनिवार, 7 नवंबर |
| दीवाली — लक्ष्मी पूजा | रविवार, 8 नवंबर |
| गोवर्धन पूजा | सोमवार, 9 नवंबर |
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (अनुमानित): 8 नवंबर को प्रदोष काल में — दिल्ली: लगभग शाम 5:30 से 7:30 बजे; मुंबई/पुणे: लगभग 6:05 से 8:05 बजे। प्रदोष काल स्थानीय सूर्यास्त से आरंभ होता है, इसलिए समय शहर के अनुसार बदलता है, और अलग-अलग पंचांग मुहूर्त की सटीक अवधि थोड़ी भिन्न बताते हैं। चोपड़ा पूजन करने वाले कई व्यापारी मध्यरात्रि का निशीथ काल भी चुनते हैं। कृपया अपने शहर का स्थानीय पंचांग या पुरोहित से सटीक समय निश्चित करें।
मुख्य बातें
| पहलू | विवरण |
| अवसर | दीवाली की रात, कार्तिक अमावस्या |
| पूजित देवता | माता लक्ष्मी और भगवान गणेश; कई परिवार कुबेर की भी पूजा करते हैं |
| मुख्य उद्देश्य | आने वाले वर्ष के लिए समृद्धि और शुभ आशीर्वाद |
| मुख्य अनुष्ठान | घर की सफाई, पूजा स्थल, दीप प्रज्वलन, मंत्र जाप और आरती |
| अवधि | सामान्यतः 1–2 घंटे |
| सर्वोत्तम समय | प्रदोष काल — सूर्यास्त से आरंभ होने वाला लगभग ढाई घंटे का समय |
दीवाली पर लक्ष्मी पूजा क्यों की जाती है?

ऐसा माना जाता है कि दीवाली की रात माता लक्ष्मी स्वच्छ, प्रकाशित और भक्ति से भरे घरों में पधारती हैं। लोक परंपरा के अनुसार समुद्र मंथन के समय माता लक्ष्मी क्षीरसागर से प्रकट हुई थीं, और दीवाली उनके प्राकट्य का उत्सव है। इसी दिन चौदह वर्ष के वनवास के बाद श्रीराम अयोध्या लौटे थे, जब नगरवासियों ने दीये जलाकर उनका स्वागत किया था। बंगाल और पूर्वी भारत में यही रात काली पूजा के रूप में मनाई जाती है।
पूजा की शुरुआत विघ्नहर्ता श्री गणेश की पूजा से होती है — इस भाव से कि समृद्धि के साथ बुद्धि भी होनी चाहिए।
लक्ष्मी पूजा की तैयारी कैसे करें?
- घर की सफाई: मान्यता है कि माता लक्ष्मी स्वच्छ और व्यवस्थित स्थानों में निवास करती हैं।
- रंगोली: प्रवेश द्वार पर रंगोली बनाएं और द्वार से पूजा स्थल तक माता लक्ष्मी के पदचिह्न बनाएं।
- दीये जलाएं: घर के हर कोने को दीयों से रोशन करें।
- पूजा स्थल: चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं; गणेश जी को बाईं ओर और माता लक्ष्मी को दाईं ओर स्थापित करें।
- पूजा सामग्री मुहूर्त से पहले तैयार रखें।
लक्ष्मी पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?
| पूजा सामग्री | उद्देश्य |
| माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र | मुख्य देवता |
| कलश (जल, आम के पत्ते और नारियल) | शुद्धता और समृद्धि का प्रतीक |
| लाल या पीला वस्त्र | पूजा स्थल ढकने के लिए |
| दीये, घी और अगरबत्ती | प्रकाश और सुगंध |
| कमल व अन्य फूल, माला | कमल माता लक्ष्मी का प्रिय पुष्प है |
| सिक्के या नोट | धन का प्रतीकात्मक अर्पण |
| मिठाई, खील-बताशे, फल और सूखे मेवे | भोग/प्रसाद |
| अक्षत, हल्दी, कुमकुम, चंदन | तिलक और पूजा |
| पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, चीनी) | अभिषेक |
| नए बही-खाते (व्यापारियों के लिए) | चोपड़ा पूजन |
घर पर चरण-दर-चरण लक्ष्मी पूजा विधि

चरण 1: स्थान की शुद्धि — पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़कें, दीपक और अगरबत्ती जलाएं और पूजा का संकल्प लें।
चरण 2: गणेश जी का आवाहन — फूल, दूर्वा, अक्षत और मोदक या लड्डू अर्पित करें और जाप करें:
ॐ गं गणपतये नमः
चरण 3: कलश स्थापना — जल से भरे कलश पर आम के पत्ते और लाल वस्त्र में लिपटा नारियल रखें; हल्दी-कुमकुम लगाएं।
चरण 4: माता लक्ष्मी का आवाहन — जाप करें:
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
पंचामृत और फिर शुद्ध जल अर्पित करें; कुमकुम, चंदन, कमल के फूल, अक्षत और सिक्के अर्पित करें।
चरण 5: भोग — मिठाई, खील-बताशे, फल और सूखे मेवे अर्पित करें और घर भर में दीये जलाएं।
चरण 6: स्तोत्र पाठ — श्रीसूक्त, महालक्ष्मी अष्टकम् या लक्ष्मी जी के 108 नामों का पाठ करें।
चरण 7: चोपड़ा पूजन — व्यापारी परिवार नए बही-खातों पर स्वस्तिक और “शुभ लाभ” लिखकर उनकी पूजा करते हैं।
चरण 8: आरती — घंटी बजाते हुए नीचे दी गई लक्ष्मी आरती गाएं और प्रसाद बाँटें।
लक्ष्मी आरती — ॐ जय लक्ष्मी माता
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
दुर्गा रूप निरंजनि, सुख सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनि, भवनिधि की त्राता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
अर्थ: आरती माता लक्ष्मी को “क्षीरोदधि-जाता” — क्षीरसागर से उत्पन्न — कहती है, और बताती है कि समुद्र मंथन से निकले चौदह रत्न उनके बिना किसी को नहीं मिलते। जिस घर में वे रहती हैं, वहाँ सब सद्गुण आते हैं और मन नहीं घबराता।
पूजा के बाद क्या करें?
- परिवार, मेहमानों और पड़ोसियों में प्रसाद बाँटें।
- बड़ों का आशीर्वाद लें और शुभकामनाएँ दें।
- रात भर एक दीया सुरक्षित स्थान पर, पर्दों और बच्चों से दूर, जलता रखें।
- ज़रूरतमंदों को दान करें — दान दीवाली का पारंपरिक अंग है।
लक्ष्मी पूजा के लिए सुझाव
- दीवाली के दिन विवाद से बचें और घर में शांत वातावरण रखें।
- संभव हो तो घी के दीये जलाएं।
- पूजा स्थल घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में रखें और पूजा करते समय पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें।
- पूजा के बाद मुख्य द्वार कुछ देर खुला रखें — मान्यता है कि इस समय माता लक्ष्मी घर में प्रवेश करती हैं।
- कई परंपराओं के अनुसार आरती के समय ताली के स्थान पर घंटी बजाएं।
लक्ष्मी पूजा का आध्यात्मिक महत्व
लक्ष्मी पूजा भौतिक और आध्यात्मिक संपदा के संतुलन की याद दिलाती है। माता लक्ष्मी धन के साथ सौभाग्य, सौंदर्य और सद्गुणों की भी देवी हैं, और गणेश जी के साथ उनकी पूजा इस भाव का प्रतीक है कि समृद्धि बुद्धि और धर्म पर आधारित होनी चाहिए। कृतज्ञता से की गई पूजा बीते वर्ष के लिए धन्यवाद और आने वाले वर्ष के लिए आशा दोनों व्यक्त करती है।
माता लक्ष्मी आपके घर को स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि से परिपूर्ण करें। 🪔 दीवाली से पहले आने वाली शारदीय नवरात्रि (11–20 अक्टूबर 2026) और माँ दुर्गा की उपासना के बारे में भी पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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दीवाली 2026 में लक्ष्मी पूजा कब है?
दीवाली 2026 में लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर को कार्तिक अमावस्या की रात है, और धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर को है। मुहूर्त प्रदोष काल में रहता है — दिल्ली में लगभग शाम 5:30 से 7:30 बजे और मुंबई-पुणे में लगभग 6:05 से 8:05 बजे; अलग-अलग पंचांगों में सटीक समय थोड़ा भिन्न मिलता है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखें।
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प्रदोष काल क्या है?
प्रदोष काल सूर्यास्त से आरंभ होने वाला लगभग ढाई घंटे का संधिकाल है, और अमावस्या तिथि के साथ पड़ने पर इसे दीवाली की लक्ष्मी पूजा का सबसे शुभ समय माना जाता है। यह स्थानीय सूर्यास्त पर निर्भर करता है, इसलिए हर शहर में अलग होता है।
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लक्ष्मी पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?
लक्ष्मी पूजा के लिए लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति या चित्र, जल-आम के पत्ते-नारियल वाला कलश, लाल या पीला वस्त्र, दीये और अगरबत्ती, कमल व फूल, सिक्के, अक्षत, हल्दी, कुमकुम, चंदन, पंचामृत, और मिठाई, खील-बताशे व फल का भोग चाहिए।
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लक्ष्मी पूजा से पहले गणेश जी की पूजा क्यों होती है?
गणेश जी विघ्नहर्ता हैं, इसलिए हर हिंदू अनुष्ठान की शुरुआत उनकी पूजा से होती है। दीवाली पर गणेश और लक्ष्मी की एक साथ पूजा होती है — गणेश जी बाईं ओर और लक्ष्मी जी दाईं ओर — इस भाव से कि समृद्धि के साथ बुद्धि भी होनी चाहिए।
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लक्ष्मी पूजा में कौन सा मंत्र जपा जाता है?
लक्ष्मी पूजा में सबसे अधिक जपा जाने वाला मंत्र ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः है, जिसमें श्रीं माता लक्ष्मी का बीज मंत्र है; इससे पहले गणेश जी के लिए ॐ गं गणपतये नमः जपा जाता है। भक्त श्रीसूक्त या लक्ष्मी जी के 108 नामों का पाठ करते हैं और ॐ जय लक्ष्मी माता आरती से समापन करते हैं।
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पूजा में माता लक्ष्मी को क्या अर्पित करें?
माता लक्ष्मी को परंपरा से कमल के फूल, अक्षत, कुमकुम, सिक्के, पंचामृत, और खीर, लड्डू, खील-बताशे जैसी मिठाइयाँ तथा फल और सूखे मेवे अर्पित किए जाते हैं। कमल का उनसे विशेष संबंध है, क्योंकि उन्हें कमल पर विराजमान दिखाया जाता है।
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लक्ष्मी पूजा में किस दिशा में बैठें?
परंपरा के अनुसार पूजा स्थल घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में रखा जाता है और पूजा करने वाला पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठता है। चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर गणेश जी को बाईं ओर और लक्ष्मी जी को दाईं ओर स्थापित किया जाता है।
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लक्ष्मी पूजा के बाद क्या करें?
लक्ष्मी पूजा के बाद परिवार और मेहमानों में प्रसाद बाँटा जाता है, बड़ों का आशीर्वाद लिया जाता है और ज़रूरतमंदों को दान दिया जाता है; कई परिवार रात भर एक दीया जलाए रखते हैं। ऐसा दीया पर्दों, बच्चों और पालतू जानवरों से दूर सुरक्षित स्थान पर रखें।