इस पृष्ठ पर श्री कृष्ण भगवान की आरती — आरती कुंजबिहारी की — के पूरे बोल दिए गए हैं, साथ ही यह बताया गया है कि भक्त इसे कब और कैसे गाते हैं, विशेषकर कृष्ण जन्माष्टमी पर।
श्री कृष्ण भगवान की आरती | Shri Krishna Aarti in Hindi
कृष्ण जन्माष्टमी, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भगवान कृष्ण के जन्म का पर्व, इस आरती का सबसे महत्वपूर्ण अवसर है। जन्माष्टमी पर भक्त लड्डू गोपाल को अनेक प्रकार से प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं।
कुछ लोग निर्जला उपवास रखते हैं, कुछ श्री कृष्ण के नाम की माला जपते हैं, और कई भक्त छप्पन भोग अर्पित करते हैं। सबसे सरल भक्ति है पूजा के बाद श्री कृष्ण आरती गाना।
परंपरा के अनुसार माखन-मिश्री और पंचामृत अर्पित कर आरती कुंजबिहारी की गाई जाती है — भक्तों का विश्वास है कि इससे भगवान श्री कृष्ण प्रसन्न होते हैं। क्योंकि कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में माना जाता है, इसलिए जन्माष्टमी की मुख्य आरती उसी समय होती है।
श्री कृष्ण भगवान की आरती
आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला
श्रवण में कुण्डल झलकाला,नंद के आनंद नंदलाला
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली
लतन में ठाढ़े बनमाली भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक
चंद्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की, आरती कुंजबिहारी की…॥
कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।
गगन सों सुमन रासि बरसै, बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग ग्वालिन संग।
अतुल रति गोप कुमारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥
जहां ते प्रकट भई गंगा, सकल मन हारिणि श्री गंगा।
स्मरन ते होत मोह भंगा, बसी शिव सीस।
जटा के बीच,हरै अघ कीच, चरन छवि श्रीबनवारी की
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥ ॥ आरती कुंजबिहारी की…॥
चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू
हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद, कटत भव फंद।
टेर सुन दीन दुखारी की
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

भक्त श्री कृष्ण भगवान की आरती क्यों करते हैं?
भक्त आरती से अनेक आध्यात्मिक, मानसिक और भावनात्मक लाभ बताते हैं। ये परंपरा और व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित हैं, वैज्ञानिक अध्ययन पर नहीं:
- आध्यात्मिक उत्थान: भक्ति बढ़ती है और भगवान कृष्ण से जुड़ाव गहरा होता है।
- मन की शांति: कई भक्तों को दिन की शुरुआत या अंत में आरती गाना शांतिदायक लगता है।
- भावनात्मक संतुलन: प्रेम, करुणा और विनम्रता की भावना को प्रोत्साहन मिलता है।
- पवित्र वातावरण: घर में भक्तिमय वातावरण बनता है; भक्त मानते हैं कि इससे दिव्य आशीर्वाद आता है।
- भक्ति और विश्वास: ईश्वर में आस्था और समर्पण की भावना दृढ़ होती है।
- परंपरा से जुड़ाव: धार्मिक परंपराएँ अगली पीढ़ी तक पहुँचती हैं।
- नियमित साधना: परिवार या समूह में आरती करने से सामुदायिक भावना बढ़ती है।
- नैतिक मार्गदर्शन: कृष्ण की शिक्षाएँ सदाचारी जीवन की प्रेरणा देती हैं।
नियमित रूप से कृष्ण भगवान की आरती करने वाले भक्त प्रायः स्वयं को अधिक स्थिर और शांत पाते हैं।
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कृष्ण भगवान की आरती से जुड़े प्रश्न
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कृष्ण भगवान की आरती क्या है?
कृष्ण भगवान की आरती, जो अपनी पहली पंक्ति आरती कुंजबिहारी की से प्रसिद्ध है, हिंदी का भक्ति गीत है जिसे भगवान कृष्ण की प्रतिमा के सामने दीपक घुमाते हुए गाया जाता है। इसमें कृष्ण की स्तुति कुंजबिहारी — वृंदावन के कुंजों में विहार करने वाले — और गिरिधर — गोवर्धन पर्वत उठाने वाले — के रूप में की गई है।
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कुंजबिहारी का अर्थ क्या है?
कुंजबिहारी का अर्थ है कुंजों में विहार करने वाले — भगवान कृष्ण का यह नाम वृंदावन के वन-कुंजों में राधा और गोपियों के साथ उनके बाल्यकाल और यौवन की याद दिलाता है। इसी आरती में उन्हें गिरिधर, अर्थात गोवर्धन पर्वत उठाने वाले, और मुरारी, अर्थात मुर राक्षस के शत्रु, भी कहा गया है।
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कृष्ण भगवान की आरती कब गाई जाती है?
आरती कुंजबिहारी की कृष्ण मंदिरों और घरों में प्रतिदिन गाई जाती है, और सबसे विशेष रूप से कृष्ण जन्माष्टमी पर, जो भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को कृष्ण के जन्म का पर्व है। जन्माष्टमी पर भक्त परंपरागत रूप से इसे मध्यरात्रि में, कृष्ण के जन्म के समय, गाते हैं।
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कृष्ण भगवान की आरती करने के क्या लाभ हैं?
भक्त परंपरागत रूप से भक्ति बढ़ाने, मन की शांति और घर में सुख-शांति के लिए भगवान कृष्ण के आशीर्वाद हेतु कृष्ण भगवान की आरती गाते हैं, और साथ मिलकर गाने से परिवार साझा उपासना में जुड़ता है। ये आस्था और अनुभव पर आधारित भक्तिपूर्ण लाभ हैं, चिकित्सीय या वैज्ञानिक दावे नहीं।
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कृष्ण भगवान की आरती कैसे की जाती है?
कृष्ण भगवान की आरती भगवान कृष्ण की प्रतिमा या मूर्ति के सामने घी या कपूर का दीपक दक्षिणावर्त घुमाते हुए भजन गाकर की जाती है, प्रायः घंटी और शंखनाद के साथ। आरती के बाद भक्त दीपक की लौ पर हाथ घुमाकर आँखों से लगाते हैं ताकि उसका आशीर्वाद ग्रहण करें।
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आरती के समय कृष्ण को क्या अर्पित किया जाता है?
आरती के समय भगवान कृष्ण को परंपरागत रूप से माखन-मिश्री, पंचामृत, तुलसी दल, फूल, फल और धूप अर्पित किए जाते हैं। माखन का विशेष संबंध कृष्ण से है, जो गोकुल के माखन चोर के रूप में उनके बचपन की याद दिलाता है, और जन्माष्टमी पर कुछ भक्त छप्पन भोग अर्पित करते हैं।
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क्या श्री कृष्ण आरती घर पर की जा सकती है?
हाँ। कृष्ण भगवान की आरती दैनिक पूजा के हिस्से के रूप में घर पर, कृष्ण या लड्डू गोपाल की तस्वीर या मूर्ति के सामने, की जा सकती है। इसके लिए केवल एक दीपक, कुछ फूल या तुलसी दल और सरल भोग की आवश्यकता है, और कई परिवार इसे प्रतिदिन सुबह-शाम गाते हैं।
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श्री कृष्ण आरती का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
कृष्ण भगवान की आरती परंपरागत रूप से सुबह पूजा के बाद और संध्या के समय गाई जाती है, जो घरेलू पूजा के दो सबसे सामान्य समय हैं। कृष्ण जन्माष्टमी पर मुख्य आरती मध्यरात्रि में होती है, जब मथुरा में कृष्ण का जन्म माना जाता है।
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कृष्ण मंदिरों में दिन भर कौन सी आरतियाँ होती हैं?
अनेक कृष्ण मंदिरों में, विशेषकर वैष्णव और पुष्टिमार्गीय परंपरा में, दिन में कई आरतियाँ होती हैं, जिनमें भोर से पहले मंगला आरती, श्रृंगार के बाद श्रृंगार आरती, दोपहर में राजभोग आरती, संध्या आरती और रात्रि विश्राम से पहले शयन आरती शामिल हैं। समय मंदिर के अनुसार बदलता है।
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क्या कोई भी श्री कृष्ण आरती कर सकता है?
हाँ। कोई भी व्यक्ति, किसी भी पृष्ठभूमि, आयु या जाति का हो, कृष्ण भगवान की आरती गा सकता है, और इसके लिए किसी दीक्षा की आवश्यकता नहीं है। परंपरा अनुष्ठान की पूर्णता से अधिक सच्ची भक्ति को महत्व देती है।